स्विंग ट्रेडिंग क्या है_Swing Trading in Hindi

स्विंग ट्रेडिंग क्या है? | Swing Trading in Hindi | What is Swing Trading in Hindi

स्विंग ट्रेडिंग क्या है?: फ्रेंडस, स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading Meaning in hindi) एक ट्रेडिंग टेक्निक है। शेयर मार्केट में स्विंग ट्रेडिंग के द्वारा ट्रेडर्स स्टॉक्स पर अपना पोजीशन बनाते हैं और यह पोजीशन कुछ दिन से लेकर कुछ हफ्तों तक होता है।

इक्विटी (Share) और डेरिवेटिव मार्केट में होने वाले मोमेंटम का लाभ उठाने का प्रयास स्विंग ट्रेडिंग के द्वारा किया जाता है।

स्विंग ट्रेनिंग का मुख्य उद्देश्य अल्पावधि (Short-Term) में बाजार से मुनाफा कमाना होता है। लॉन्गटर्म इन्वेस्टमेंट की तुलना में शॉर्टटर्म में ही मुनाफा कमाने के लिए स्विंग ट्रेडिंग का सहारा ट्रेडर्स लेते हैं। स्विंग ट्रेडिंग की गति तेज होने के कारण इसे ट्रेडिंग किंग भी कहा जाता है।

Swing Trading Basics (स्विंग ट्रेडिंग बेसिक्स)

Swing Trading में मुख्यतया टेक्निकल एनालिसिस और साथ ही फंडामेंटल एनालिसिस का भी प्रयोग किया जाता है। टेक्निकल एनालिसिस में चार्ट और इंडिकेटर्स का उपयोग कर ट्रेडर्स किसी स्टॉक्स या इंडेक्स के मूवमेंट और पैटर्न्स को समझकर Swing Trading को करता है।

इसके अलावा स्विंग ट्रेडर्स किसी कंपनी के रिजल्ट, रिपोर्ट, न्यूज़ इत्यादि को ध्यान में रखकर भी अपना पोजीशन बनाता है। ऐसे ही बाजार के कई अवसरों का लाभ ट्रेडर्स अक्सर स्विंग ट्रेडिंग कर उठाते है।

Swing Trading का लाभ लेने के लिए ट्रेडर को टेक्निकल एनालिसिस के साथ ही फंडामेंटल एनालिसिस का भी अच्छा ज्ञान होना चाहिए। टेक्निकल एनालिसिस के द्वारा वो स्टॉक्स के मूवमेंट्स और आगे के प्राइस पैटर्न्स को समझ सके।

वहीं फंडामेंटल एनालिसिस कर संबंधित कंपनी और उसके शेयर के आंतरिक मूल्यों जान सके। इन दोनों एनालिसिस के बाद ट्रेडर्स ऐसे स्टॉक्स, कमोडिटी या उसके डेरिवेटिव्स को चुनते है, जो उन्हें बहुत कम अवधि में एक अच्छा लाभ दें सके।

चूँकि स्विंग ट्रेडिंग एक शॉर्टटर्म ट्रेडिंग टेक्निक है, इसलिए इसमें रिटर्न के टारगेट भी स्माल होते है। मगर ट्रेडर्स मल्टीपल टाइम ट्रेडिंग कर इस ट्रेडिंग टेक्निक से एक अच्छा मुनाफा प्रायः बना लिया करते है।

Swing Trading Strategies in hindi (स्विंग ट्रेडिंग रणनीतियाँ)

सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल्स

सपोर्ट एंड रेजिस्टेंस लेवल्स टेक्निकल एनालिसिस का एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट थियोरी है। स्विंग ट्रेडर्स इसप्रकार के Swing Trading Indicators का हमेशा प्रयोग करते है। चार्ट्स पर आपको एक ऐसा लेवल दिखाई पड़ता है, जहाँ से शेयर का प्राइस नीचे नहीं जाता, बल्कि उस लेवल से वह ऊपर आने लगता है। यहाँ पर शेयर को बाइंग सपोर्ट मिल जाता है। स्विंग ट्रेडर्स इस लेवल पर अपना बाइंग पोजीशन बना कर, सपोर्ट लेवल के थोड़ा नीचे अपना स्टॉप लॉस लगाता है। इसप्रकार वह आप साइड मूवमेंट बनाकर स्विंग ट्रेडिंग करता है।

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ठीक इसके विपरीत रेजिस्टेंस लेवल पर ट्रेड किया जाता है। चार्ट्स पर आपको एक ऐसा लेवल दिखाई पड़ता है, जहाँ से शेयर का प्राइस और ऊपर नहीं जाता, बल्कि उस लेवल से वह नीचे गिरने लगता है। यहाँ पर शेयर को सेलिंग सपोर्ट मिल जाता है।  स्विंग ट्रेडर्स इस लेवल पर अपना सेलिंग का पोजीशन बनाता, रेजिस्टेंस लेवल के थोड़ा ऊपर अपना स्टॉप लॉस लगता है। इसप्रकार वह डाउन साइड का मूवमेंट बनाकर Swing Trading करता है।

सिंपल मूविंग एवरेज टेक्निक

यह एक लोकप्रिय ट्रेडिंग टेक्निक है। स्विंग ट्रेडिंग के टूल्स में इस Swing Trading Indicators का उपयोग अक्सर ट्रेडर किया करते है। सिंपल मूविंग एवरेज टेक्निक से आप अपने निर्धारित ट्रेडिंग अवधि को ध्यान में रखकर यहाँ से अपने लिए पोजीशन डिसाइड कर सकते है।

सिंपल मूविंग एवरेज एक टेक्निकल इंडिकेटर जो यह निर्धारित करने में मदद करता है कि, क्या स्टॉक का मूल्य ऐसे ही रहेगा या तेजी या मंदी के इस ट्रेंड को उलट देगा।

चैनल ट्रेडिंग टेक्निक्स

जब एक ट्रेंड (तेज़ी या मंदी) में ट्रेडिंग करना हो तो चैनल ट्रेडिंग को अपनाया जाता है। चार्ट पर दो समनांतर लाइनों के बीच जब कोई स्टॉक का मूवमेंट हो रहा हो, तो उससे चैनल ट्रेडिंग टेक्निक का प्रयोग कर पोजीशन बनाया जाता है।

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अगर आपने एक स्टॉक चार्ट पर तेजी का पोजीशन बनाया है, तो आप चैनल के निचले लाइन से ऊपर की दिशा पकड़ने पर बॉय साइड की पोजीशन बनाएंगे। इसके बाद शेयर की क़ीमत जब ऊपर के लाइन में जाने लगे, तो वहाँ आप अपना प्रॉफ़िट बुक कर स्टॉक को सेल कर दें।

MACD क्रॉस ओवर

MACD क्रॉसओवर ट्रेंड डायरेक्शन और रिवर्सल को सेट करने के लिए एक प्रचलित टेक्निकल इंडिकेटर है। MACD क्रॉसओवर में दो लाइनें- MACD लाइन और सिग्नल लाइन होती है।

जब MACD लाइन सिग्नल लाइन के नीचे से गुजरती है तो बेयरिश ट्रेंड की सम्भावना बनती है, जहाँ सेल की पोजीशन बनाना अच्छा है। जब MACD लाइन सिग्नल लाइन के ऊपर से गुजरती है तो बुलिश ट्रेंड की सम्भावना बनती है, जहाँ बॉय की पोजीशन बनाना अच्छा होता है। जब ट्रेडर को अपने पोजीशन का विपरीत ट्रेंड देखने को मिलता है तो वह वहां से बहार निकल जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग तकनीक (Swing Trading Strategies India)

Swing Trading करने के एक सही स्टॉक/कमोडिटी का चुनना को चुनना बहुत ज़रूरी है। सही स्टॉक का मतलब एक ऐसा स्टॉक जिसमे लिक्विडिटी और वॉल्यूम अच्छे स्तर का हो। इसके अलावा वह स्टॉक एक ट्रेंड को फॉलो कर रहा हो।

स्विंग ट्रेडिंग तब और फायदेमंद होता है जब बाज़ार में बहुत उतार-चढ़ाव हो। इससे शेयर्स की कीमतों में एक मोमेंटम बनता है, जिससे ट्रेड करने की ऑपर्चुनिटी ज्यादा मिलती है।

Swing Trading के अवसरों के पहचान के लिए विभिन्न ट्रेडिंग इंडिकेटर्स का इस्तेमाल करना और प्राइस पैटर्न को समझना ज़रूरी होता है। हरेक इंडिकेटर्स प्राइस मूवमेंट्स को लेकर अलग-अलग बातों की ओर संकेत करते है।

स्विंग ट्रेडिंग के फायदे और नुकसान

स्विंग ट्रेडिंग के फायदे

  • इंट्राडे ट्रेडिंग में जहाँ दिनभर अपने ट्रेडिंग पोजीशन को देखते रहना पड़ता है, वहीं Swing Trading के मामलें यह समस्या उतनी ज्यादा नहीं होती है।
  • स्विंग ट्रेडिंग से बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव का लाभ बड़ी आसानी से उठाया जा-सकता है।
  • टेक्निकल एनालिसिस और विभिन्न इंडिकेटर्स Swing Trading को ट्रेडर्स  के लिए बहुत ही आसान बना देता है।
  • कम अवधि में ही एक बेहतर मुनाफे की सम्भावना स्विंग ट्रेडिंग में बनती है।

स्विंग ट्रेडिंग के नुकसान

  • स्विंग ट्रेडिंग में आपके पोजीशन ओवर-नाइट और सप्ताहिक बाजार जोखिम के अधीन होते है।
  • पोजीशन के विपरीत अचानक बाजार में बड़े उलटफ़ेर होने से काफी नुकसान हो सकता है।
  • टेक्निकल एनालिसिस और विभिन्न इंडिकेटर्स के सही इस्तेमाल की जानकारी का आभाव।
  • स्विंग ट्रेडर्स अक्सर अपने एनालिसिस में बहुत से इंडिकेटर्स शामिल कर लेते है और शंकाओं में फंस जाते है।

निष्कर्ष (Conclusion)

अंतिम रूप से यह कहा जा-सकता है कि, ये सभी टेक्निक्स स्विंग ट्रेडिंग में अपनाया जाता है। हरेक ट्रेडर का अपना ट्रेडिंग सिस्टम या रूल होता है, जिसमें वह अपने अनुसार इन इंडिकेटर्स का इस्तेमाल किया करता है।

आप अपने लिए एक ट्रेडिंग सिस्टम बनाये और उसे अपने ट्रेडिंग में उपयोग करके देखें। स्ट्रीक्ट स्टॉपलॉस और टारगेट को ध्यान में रखकर अपने ट्रेड करें। कुछ ट्रेड प्रैक्टिस के बाद आप इसमें कम्फ़र्ट हो जायेंगे। इस सब में सावधानियाँ हमेशा बरतें क्योंकि प्रॉफ़िट और लॉस के लिए आप स्वयं ज़िम्मेदार है।

मैं आशा करता हूँ कि, आपको ये आर्टिकल “स्विंग ट्रेडिंग क्या है?” शेयर मार्केट में ट्रेड करने के लिए फ़ायदेमंद लगा होगा। इसे अपने परिचितों के साथ शेयर ज़रूर करें, ताकि वो भी Swing Trading टेक्निक का लाभ लें सकें।

इस विषय पर आपके और कोई प्रश्न है, तो Comment Section में ज़रूर लिखें। शेयर मार्केट से जुड़ी नई जानकारियों के लिए इस वेबसाइट से जुड़े रहें।

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