Financial Planning kaise kare

फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करे?

Financial Planning kaise kare: फ्रैंड्स, लाइफ के छोटे-बड़े किसी भी कार्य को हम तभी प्रभावी रूप से पूरा कर पाते हैं, जब हम उसकी बेहतर प्लानिंग करते हैं। ठीक यही बात हमारी फाइनेंसियल गोल को पूरा करने में भी लागू होती है।

आपके जीवन में ऐसे बहुत से फाइनेंसियल गोल हो सकते हैं, जिन्हें आप प्राप्त करना चाहते हैं। लेकिन उन सभी को आप तभी पा-सकते हैं जब आप उनके लिए एक प्रभावशाली फाइनेंसियल प्लानिंग को तैयार करते हैं।

फाइनेंसियल प्लानिंग को तैयार करने के दो तरीके है। या तो आप इसे स्वयं भी तैयार कर सकते हैं या फिर आप किसी सर्टिफाइड फाइनेंसियल प्लानर की मदद ले सकते हैं।

लेकिन इन दोनों ही बातों में एक चीज हमेशा कॉमन रहेगी वह है आपका – लाइफ गोल्स या फाइनेंसियल गोल

यदि आप चाहें तो इसे स्वयं भी तैयार कर सकते हैं इसके लिए कोई विशेष योग्यता की जरूरत नहीं है। आप थोड़ी सी जानकारी इकट्ठा कर अपनी जरूरत के अनुसार एक अच्छा फाइनेंसियल प्लानिंग अपने लिए तैयार कर सकते हैं।

फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करे?

Financial tips in Hindi: फ्रैंड्स, फाइनेंसियल प्लानिंग बनाते समय कुछ स्टेप्स को हमें फॉलो करने चाहिए, आइए हम उन तरीकों को नीचे समझने का प्रयास करते हैं:

अपनी वर्तमान फाइनेंसियल कंडीशन को समझें (Understand your Financial Condition)

फाइनेंसियल प्लानिंग की शुरुआत करते समय आप अपने फाइनेंसियल कंडीशन अर्थात आय, व्यय, बचत और ऋण इत्यादि की स्थितियों को समझने का प्रयास करें।

आप अपनी आय के स्रोत, खर्च करने के तरीके और बचत की रणनीतियों पर विचार करें और उन्हें निर्धारित करने का प्रयास करें।

फाइनेंसियल गोल को तय करें (Set the Financial Goal)

अपनी फाइनेंसियल कंडीशन समझने के बाद आप अपने फाइनेंसियल गोल को निर्धारित करने का प्रयास करें।

आप अपने आप से प्रश्न करें कि, आने वाले समय में मेरे क्या-क्या लक्ष्य है और इनको पूरा करने के लिए मुझे कितनी मात्रा में धन/पैसों की आवश्यकता होगी?

बगैर किसी संकोच के आप अपनी इच्छाओं व जरूरतों को लिखते जाएं और अगर आप चाहें तो उन्हें शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म गोल में बांट दें।

अपनी फाइनेंसियल गोल तय करते समय अपनी आय, व्यय, बचत और निवेश को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण तैयार करें, जिससे आगे आपको इन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

कन्टिजेन्सी फंड (Contingency Fund)

आप अपनी आय का एक हिस्सा भविष्य की किसी भी प्रकार की आकस्मिक घटनाओं से निपटने के लिए इमरजेंसी फंड को तैयार कर सकते हैं। ताकि समस्या के समय आप उससे आसानी से निपट सकें और आप पर किसी भी प्रकार का कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ न आए।

बीमा (Insurance)

आप एक बीमा पॉलिसी को जरूर लेना चाहिए। यदि आप पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी है और आप अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाले व्यक्ति हैं। तो आपको एक टर्म इंश्योरेंस प्लान ले सकते है।

इसके अलावा अपने परिवार के सदस्यों के लिए अगर आप चाहे तो हेल्थ इंश्योरेंस करा सकते हैं। ताकि यदि कभी परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य समस्या होती है, तो आप उनका मेडीक्लेम कर सकें।

बचत को बढ़ाने का प्रयास करें (Try to Increase Savings)

अधिकांश लोगों की प्रवृत्ति हमेशा खर्च करने की होती है। इसके कारण वह अपनी कमाई का ज्यादातर हिस्सा खर्च कर डालते हैं और बचत नहीं कर पाते हैं।

बचत ना होने के कारण आप पर्याप्त मात्रा में निवेश नहीं कर पाते हैं, जिससे भविष्य में आप बड़ी पूंजी को तैयार नहीं कर पाते हैं।

अपनी जरूरतों और फाइनेंसियल गोल को पाने के लिए अधिक से अधिक बचत करना हम सभी के लिए जरूरी होता है।

जोखिम का आंकलन (Risk Assessment)

निवेश करने से पहले अपनी जोखिमों का आकलन कर लेना बहुत जरूरी होता है। बहुत से निवेश माध्यमों में रिस्क उसका एक महत्वपूर्ण भाग होता है।

हालांकि जल्दी किया गया निवेश आपको हाई रिटर्न देने के साथ ही उच्च जोखिम लेने की क्षमता भी देता है। लेकिन किसी भी स्थिति में अपने जोखिम वहन करने की क्षमता का एक बार आकलन कर लेना चाहिए।

निवेश करें (Investing)

अपनी जोखिम वहन करने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए, विवेकपूर्ण तरीके से अपने पैसों का निवेश करें। अपने लक्ष्यों के अनुरूप आप अपने लिए निवेश माध्यमों को चुन सकते हैं।

आप अपने निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाइड रखने का प्रयास करें। अपना सभी पैसा एकमुस्त किसी एक निवेश योजना पर ना लगाएं। बल्कि अलग-अलग योजनाओं में अपना पैसा लगाएं।

संपत्ति का एलोकेशन (Assets Allocation)

अपनी जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार अलग-अलग परिसंपत्तियों (Assets) में निवेश का निर्णय लेना चाहिए।

आप हाई रिस्क और रिटर्न के साथ निवेश विकल्प को अपना सकते हैं या मीडियम रिस्क और रिटर्न के साथ निवेश विकल्प को अपना सकते हैं। या फिर आप चाहे तो बहुत ही सुरक्षित निवेश विकल्पों को भी अपना सकते हैं।

पेंशन फंड (Pension Funds)

रिटायरमेंट के बाद हमारी नियमित आय लगभग बंद हो जाती है। लेकिन हमारे खर्चे और ज़्यादा बढ़ जाते हैं। इन खर्चों को पूरा करने के लिए आपके पास अगर पर्याप्त मात्रा में धन ना हो तो बहुत सी आर्थिक समस्याओं से जुड़ना पड़ता है।

इसलिए जितनी जल्दी हो सके पेंशन फंड के लिए भी अपनी आय का एक हिस्सा जरूर निकालने का प्रयास करें।

टैक्स प्लानिंग (Tax Planning)

अगर आपकी आय कर के दायरे में आती है और आपकी आय का एक बड़ा हिस्सा कर के रूप में चला जाता है। तो अब प्रश्न ये कि, इस Tax का Financial planning kaise kare? इसके लिए आप ऐसे योजनाओं का लाभ लेने का प्रयास करें, जिससे आपको अपने टैक्स भुगतान में छूट मिल सके।

जैसे (Money saving tips hindi): अगर आपका होम लोन है उस पर थोड़ी छूट, बच्चों की स्कूल फीस पर छूट, कुछ निवेश योजनाओं पर मिलने वाले छूट का इस्तेमाल कर आप अपने टैक्स देनदारी पर राहत पा-सकते हैं।

तो इस प्रकार कुछ महत्वपूर्ण बातें हैं जिसके आधार पर हम अपनी फाइनेंसियल प्लानिंग को तैयार कर सकते हैं और समय के साथ-साथ उसे और बेहतर बना सकते हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

मैं आशा करता हूँ कि, आपको यह आर्टिकल Financial Planning kaise kare (फाइनेंसियल प्लानिंग कैसे करे?) पढ़कर अच्छा लगा होगा और फाइनेंसियल प्लानिंग के टिप्स (Financial tips) से जुड़ी ये जानकारियां आपके लिए फायदेमंद रही होगी।

अगर आपको फाइनेंसियल प्लानिंग (वित्तीय योजना) से जुड़ा यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने परिचितों और शेयर मार्केट/फाइनेंसियल प्लानिंग को जानने-सीखने के लिए इच्छुक लोगों के साथ इसे शेयर ज़रूर करें।

इस विषय पर आपके और कोई आपके प्रश्न है, तो आप नीचे Comment Section में ज़रूर लिखें। हम आपके सवालों का जवाब देने प्रयास करेंगे। शेयर मार्केट और फाइनेंसियल प्लानिंग जुड़ी नयी जानकारियों के लिए इस वेबसाइट से जुड़े रहें।

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