What is Finance in Hindi_Finance kya hai

फाइनेंस क्या है? | What is Finance in Hindi

फाइनेंस क्या है?(What is Finance in Hindi?): फ्रैंड्स, आर्थिक क्रियाकलापों में फाइनेंस (वित्त) एक व्यापक शब्द है। जब हम फाइनेंस की बात करते हैं तो अलग-अलग संदर्भों में इसके अर्थ भी अलग-अलग होते हैं। लेकिन मोटे तौर पर फाइनेंस में वो सभी बातें आ जाती हैं, जो कहीं ना कहीं आर्थिक पक्षों से जुड़ी होती है।

फाइनेंस शब्द के अंतर्गत ऋण (डेब्ट), कैपिटल मार्केट (पूंजी बाजार), बैंकिंग, संपत्ति, धन और इन्वेस्टमेंट (निवेश) से जुड़ी गतिविधियां आती है।

फाइनेंस शब्द मुख्य रूप से मनी मैनेजमेंट और मनी कलेक्शन या फंडिंग के प्रोसेस को इंडिकेट करता है।

फाइनेंस क्या होता है? (Finance kya hota hai)

फाइनेंस को मुख्यतः दो अर्थों में समझा जा सकता है:

फाइनेंस मतलब धन का प्रबंधन (Money Management) करना है जिसमें डेब्ट, पूंजी बाजार, मुद्रा बाजार, बैंकिंग, किराया इत्यादि शामिल होते हैं।

फाइनेंस का मतलब किसी व्यक्ति या संस्था के द्वारा अपनी आवश्यकताओं के लिए धन जुटाने का कार्य।

फाइनेंस को हिंदी भाषा में (Finance meaning in Hindi) – वित्त कहा जाता है ।

फ्रैंड्स, इन सबके अलावा फाइनेंस के सिद्धांतों की बात की जाए तो इसमें एक बड़ा ही महत्वपूर्ण सिद्धांत टाइम वैल्यू ऑफ मनी (धन का समय मूल्य) है।

वित्त का यह सिद्धांत इस बात को बताता है कि, आज धन/पैसे की जो वैल्यू है वह आने वाले भविष्य में वर्तमान वैल्यू से अधिक की होगी।

इसका मतलब यह है कि, हम किस प्रकार पैसों का प्रबंधन (Money Management) करें कि, वर्तमान धन का मूल्य आने वाले भविष्य में उससे अधिक का हो।

इस प्रकार फाइनेंस एक व्यापक शब्द है जिसमें मनी मैनेजमेंट के अध्ययन के साथ-साथ, आर्थिक नियमों से जुड़ी सभी गतिविधियां शामिल हो जाती है।

जब किसी उद्देश्य या व्यवसाय के विकास के लिए धन की आवश्यकता होती है और जब उस धन/फण्ड की आपूर्ति की जाती है, तो इसे वित्तीयन (Financing) कहा जाता है। इस वित्तीयन (Financing) के एवज में किया जाने वाला भुगतान ब्याज (Interest) कहलाता है।

सरकार, कंपनियां और व्यक्तियों के द्वारा अपनी उद्देश्य और आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इस प्रकार के ऋण लिए जाते हैं। ऋण या उधार लेने की प्रक्रिया ये प्रक्रिया ही वित्तीयन (Financing) कहलाती है।

फाइनेंस के प्रकार (Types of Finance in Hindi)

एक अर्थव्यवस्था में व्यवसायिक संस्थानों, सरकारी संस्थानों और व्यक्तियों को अपनी आर्थिक गतिविधियों को चलाने के लिए धन/पैसों की आवश्यकता होती है। फ्रैंड्स, इसीलिए फाइनेंस को तीन प्रकारों में बांटा जाता है:

पब्लिक फाइनेंस, कॉरपोरेट फाइनेंस और पर्सनल फाइनेंस।

Types of Finance in Hindi

पर्सनल फाइनेंस (Personal Finance in Hindi)

फाइनेंस किसी व्यक्ति के धन या पैसों के प्रबंधन (Money Management) से जुड़ा हुआ है। पर्सनल फाइनेंस किसी व्यक्ति के विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उसके आय, ख़र्च, बचत या निवेश से संबंधित होता है।

पर्सनल फाइनेंस प्रत्येक व्यक्ति के लिए भिन्न हो सकता है। यह व्यक्ति की आय क्षमता, उसकी आवश्यकताएँ, उसके वर्तमान और भविष्य के ख़र्चे, बचत या निवेश की समय सीमा इत्यादि पर निर्भर करता है।

पर्सनल फाइनेंस बुनियादी तौर पर किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़े विभिन्न दायित्वों जैसे स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च, करों की देनदारी, मकान ख़रीदना, लोन (कार या हाउस लोन), बीमा, पेंशन, बचत और निवेश इत्यादि से जुड़े बातों को लेकर की जाने वाली फाइनेंसियल प्लानिंग (Financial Planning) से है।

फ्रैंड्स, पर्सनल फाइनेंस (Personal Finance) में आने वाली महत्वपूर्ण बातों को कुछ बिंदुओं से समझने का प्रयास करते हैं:

  • पर्सनल फाइनेंस के अंतर्गत व्यक्ति की आय और उसके खर्च से जुड़ी बातों को जाना और समझा जाता है।
  • पर्सनल फाइनेंस (फाइनेंसियल प्लानिंग) के द्वारा भविष्य की अप्रत्याशित किसी भी प्रकार की घटनाओं या जोखिम से संरक्षण के उपाय करना।
  • टैक्स की देनदारियों को मैनेज करना, सब्सिडी और छूट का लाभ लेना।
  • लोन की देनदारियों के फाइनेंसियल प्लानिंग करना।
  • बचत और निवेश के लिए स्ट्रेटजी तैयार करना।

किसी व्यक्ति को अपने और परिवार की जरूरतों को ध्यान में रखकर अपने आर्थिक पक्ष को मजबूत करना होता है और इन सभी बातों के पर्सनल फाइनेंस (Personal Finance) शब्द का प्रयोग किया जाता है। किसी भी व्यक्ति की वित्तीय स्थिति (फाइनेंसियल पोजिशन) एक बेहतर फाइनेंसियल प्लानिंग के द्वारा मजबूत की जा सकती है।

कॉरपोरेट फाइनेंस (Corporate Finance in Hindi)

कॉरपोरेट फाइनेंस कंपनी को चलाने के लिए विभिन्न वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने से संबंधित होता है।

Corporate Finance (कंपनी वित्त) कंपनी के खर्चों की फाइनेंसिंग से संबंधित है। खर्चों की फाइनेंसिंग के अलावा कंपनी की पूंजी में विस्तार कर कंपनी के वैल्यू को ऊपर उठाना भी है।

कॉरपोरेट फाइनेंस (Corporate Finance) में कंपनी के वित्तीय जोखिम को मैनेज करने के साथ ही साथ कंपनी के लिए नए व्यापार के अवसरों को उपलब्ध कराने का प्रयास भी होता है।

फ्रैंड्स, कॉरपोरेट फाइनेंस में आने वाली महत्वपूर्ण बातों को कुछ बिंदुओं से समझने का प्रयास करते हैं:

  • कंपनी का बाजार जोखिमों के लिए रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करना।
  • कंपनी के ग्रोथ के लिए इक्विटी और विभिन्न प्रकार के संपत्तियों पर निवेश करना।
  • कंपनी के बिजनेस से जुड़ी बाधाओं और जोखिम को दूर करना।
  • कॉरपोरेट फाइनेंस (Corporate Finance) के द्वारा कंपनी के कर से जुड़े मामलों की प्लानिंग करना और उसको मैनेज करना।

पब्लिक फाइनेंस (Public Finance)

पब्लिक फाइनेंस देश की सरकारों के वित्तीय नियोजन से संबंधित है। पब्लिक फाइनेंस सरकारी मशीनरी अर्थात केंद्र सरकार, राज्य सरकार, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन इत्यादि के वित्तीय नियोजन से संबंधित है।

Public Finance (लोक वित्त) सरकार के आय के स्रोत, उसके विभिन्न संसाधन, सरकार के खर्चे, बचत, निवेश और आर्थिक स्थिरता (इकोनामिक स्टेबिलिटी) जैसी बातों से संबंधित है।

फ्रैंड्स, पब्लिक फाइनेंस (Public Finance) में आने वाली महत्वपूर्ण बातों को कुछ बिंदुओं से समझने का प्रयास करते हैं:

  • पब्लिक इंस्टीट्यूशन (सरकार) के राजस्व के स्रोत क्या है?
  • पब्लिक इंस्टीट्यूशन (सरकार) के कौन-कौन से संभावित ख़र्चे है?
  • सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले करों का प्रबंधन करना।
  • बजट की प्रक्रिया और संसाधनों के लिए प्लानिंग करना।
  • देश की आर्थिक स्थिति को स्टेबल रखने का प्रयास करना।
  • इस प्रकार पब्लिक फाइनेंस देश की सरकारों के लिए एक महत्वपूर्ण भाग होता है।

पब्लिक फाइनेंस (Public Finance) के अंतर्गत सरकारें अपने सभी आर्थिक क्रिया-कलापों को गति देने के साथ-साथ उसकी दिशा को भी तय करने का प्रयास करती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

मैं आशा करता हूँ कि, आपको यह आर्टिकल फाइनेंस क्या है? (What is Finance in Hindi) पढ़कर अच्छा लगा होगा और फाइनेंस के प्रकारों से जुड़ी ये जानकारियां आपके लिए लाभदायक रही होगी।

अगर आपको फाइनेंस से जुड़ा यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने परिचितों और शेयर मार्केट/फाइनेंसियल सेक्टर को जानने-सीखने के लिए इच्छुक लोगों के साथ इसे शेयर ज़रूर करें।

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