Economy in Hindi_Economy Kya Hai_अर्थव्यवस्था क्या है

अर्थव्यवस्था क्या है?

Economy in Hindi: अर्थव्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके केंद्र में धन या मुद्रा की बात हो।

अर्थशास्त्र सामाजिक विज्ञान की एक शाखा है और अर्थव्यवस्था अर्थशास्त्र के नियमों और सिद्धांतों का व्यवहारिक चित्र प्रस्तुत करने वाली व्यवस्था होती है।

अर्थव्यवस्था (Economy Meaning in Hindi): अर्थ और व्यवस्था दो शब्दों से मिलकर बना है जहां पर अर्थ का मतलब मुद्रा या धन या संसाधन होता है वहीं व्यवस्था का मतलब एक सरचना या तंत्र से है।

इस प्रकार अर्थव्यवस्था एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके केंद्र में धन या संसाधनों के सम्बन्ध में बात हो।

अर्थव्यवस्था के संबंध में सबसे प्राचीन उल्लेख हमें कौटिल्य के द्वारा लिखित “अर्थशास्त्र” में मिलता है।

अर्थव्यवस्था क्या है?

अर्थव्यवस्था में मोटे तौर पर तीन आधारभूत गतिविधियां उत्पादन (Production), उपभोग (Consumption) और वितरण (Distribution) संचालित होती हैं। इसके अलावा बचत और निवेश आर्थिक क्रियाकलापों में महत्वपूर्ण होते हैं।

व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वस्तुओं एवं सेवाओं का उत्पादन करता है।

उत्पादित वस्तुओं का देश या समाज में लोगों को वितरण होता है और यह वितरित वस्तुएं एवं सेवाएं व्यक्तियों के द्वारा उपयोग की जाती है।

इस पूरी प्रणाली को पूरा करने के लिए संसाधनों अर्थात आय की आवश्यकता होती है। आय होने के बाद ही यह करना संभव हो पाता है।

आय का एक हिस्सा बचत और बचत पुनः निवेश के रूप में उत्पादन कार्यों में लग जाता है।

इस प्रकार अर्थव्यवस्था का यह संपूर्ण आर्थिक तंत्र व्यक्तियों की आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। अर्थव्यवस्था का यह ढाँचा संसाधनों के सृजन (अर्थव्यवस्था के मुख्य स्त्रोत) से लेकर वितरण और उपभोग के चक्र को दर्शाता है।

अर्थव्यवस्था के प्रकार (Types of Economy in Hindi)

अर्थव्यवस्था को उसकी कार्यप्रणाली के आधार पर कई वर्गों में बांटा गया है:

विकास प्रक्रिया के आधार पर: 

अविकसित अर्थव्यवस्था

ऐसी अर्थव्यवस्था जो विकसित नहीं हो पाई है। जहां पर या तो संसाधन नहीं है, या संसाधन है भी तो उनका विकास नहीं हो पाया है।

ऐसी इकोनामी में रहने वाले नागरिकों का जीवन स्तर निम्न रहता है और देश में गरीबी, कुपोषण, आर्थिक पिछड़ापन की समस्याएं विद्यमान रहती हैं। जैसे: सूडान।

विकसित अर्थव्यवस्था

विकसित अर्थव्यवस्था के तहत, ऐसी अर्थव्यवस्था जिनका विकास हो चुका है। जिन्होंने अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर अपनी सभी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रयास किया है।

ऐसी इकोनामी में लोगों का जीवन स्तर उच्च होता है और देश में आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। जैसे: अमेरिका, ब्रिटेन।

विकासशील अर्थव्यवस्था

ऐसी अर्थव्यवस्था जो अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपने देश के संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है और अविकसित अर्थव्यवस्था की श्रेणी से निकलकर आगे बढ़ चुकी है।

ऐसी इकोनामी में धीरे-धीरे लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठता जाता है। धीरे-धीरे देश में आर्थिक स्थापित होती जाती है। जैसे: भारत।

संसाधनों के स्वामित्व के आधार पर:

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था

पूंजीवादी अर्थव्यवस्था बाजार की शक्तियों अर्थात मांग और आपूर्ति के नियमों के आधार पर स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। यहां पर सरकार का हस्तक्षेप नाम-मात्र का होता है। इसे बाजार आधारित अर्थव्यवस्था भी कहा जाता है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था

ऐसी अर्थव्यवस्था आर्थिक समानता बनाने पर बल देती है। यह अर्थव्यवस्था का कार्लमार्क्स के सिद्धांतों के आधार पर चलती है।

समाजवादी अर्थव्यवस्था में निर्णय आर्थिक समानता आधार पर लिया जाता है। इस व्यवस्था में उत्पादन के समस्त संसाधनों पर सरकार या समाज का अधिकार होता है। जैसे: रसिया या चाइना।

मिश्रित अर्थव्यवस्था

एक ऐसी अर्थव्यवस्था की प्रणाली है, जिसमें पूंजीवादी और समाजवादी अर्थव्यवस्था के प्रारूपों का मिश्रण होता है। अर्थात दोनों के सिद्धांत को इस ढांचे में अपनाया जाता है।

दूसरे शब्दों में एक अर्थव्यवस्था जिसमें सरकारी और निजी दोनों उपक्रम हो, वह मिश्रित अर्थव्यवस्था कहलाती है? देश के संसाधनों के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर सरकार का अधिकार होता है, वही अर्थव्यवस्था के विकास के लिए पूंजीवादी ढांचे की महत्वपूर्ण भूमिका भी होती है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था का ढांचा सन 1930 की महामंदी के बाद आया। जिसमें ये माना गया कि, अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को दूर करने के लिए मिश्रित ढांचे को अपनाना हर एक देश के लिए लाभदायक होता है।

इस ढांचे में बाजार आधारित प्रणाली (पूंजीवादी अर्थव्यवस्था) अर्थव्यवस्था के विकास को आगे बढ़ाती है, वहीं समाजवादी ढांचा आर्थिक संकट के समय अर्थव्यवस्था को उबारने का प्रयास करती है।

मिश्रित अर्थव्यवस्था एक नियोजित अर्थव्यवस्था होती है और भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप (भारत) इसका एक बेहतरीन उदाहरण है।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के आधार पर: 

खुली अर्थव्यवस्था

इसमें स्वतंत्र प्रतियोगिता को बल देते हैं। यह एक नियंत्रण मुक्त अर्थव्यवस्था होती है। वैश्वीकरण के दौर में अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ खुली अर्थव्यवस्था के रूप में वैश्विक व्यापार में शामिल हो रही हैं।

बंद अर्थव्यवस्था

इस प्रकार की अर्थव्यवस्था में संपूर्ण आर्थिक क्रियाएँ देश की सीमा के भीतर ही होती हैं। इसमें विदेशी व्यापार की गतिविधियां शामिल नहीं होती है।

अर्थव्यवस्था के क्षेत्र

अर्थव्यवस्था के कितने सेक्टर हैं? सीएसओ (CSO) के द्वारा पहली बार राष्ट्रीय आय (GDP) के अनुमानों के लिए अर्थव्यवस्था को 13 क्षेत्रों में बांटा गया था उसके बाद वर्ष 1966-67 मैं दूसरी बार भारतीय अर्थव्यवस्था को 3 क्षेत्रों में बांटा गया है।

प्राथमिक क्षेत्र

इसके अंतर्गत प्रकृति प्रदत्त संसाधनों को शामिल किया जाता है जैसे कृषि, वन, मत्स्य, खनिज इत्यादि।

द्वितीय क्षेत्र

इसमें प्रकृति प्रदत्त संसाधनों का विनिर्माण कर नए वस्तुओं का सृजन किया जाता है। जैसे रुई से कपड़े बनाना, गन्ने से शुगर तैयार करना। इसीलिए इसमें औद्योगिक क्षेत्र को शामिल किया जाता है।

तृतीयक क्षेत्र

इसे सेवा क्षेत्र भी कहते हैं। इस क्षेत्र में परिवहन, बैंक, बीमा, संचार सेवाएं जैसी अदृश्य मदें शामिल की जाती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

मैं आशा करता हूं कि, आपको यह आर्टिकल अर्थव्यवस्था क्या है? (What is Economy in Hindi) पढ़कर अच्छा लगा होगा। अर्थव्यवस्था के प्रकार और उसके क्षेत्रों को जानकर आपको अर्थव्यवस्था की संपूर्ण कार्य-प्रणाली की जानकारी मिली होगी।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा तो इसे अपने दोस्तों और परिचितों के साथ शेयर जरूर करें।

अर्थव्यवस्था को लेकर आपके मन में और कोई प्रश्न है, तो नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर लिखें। अर्थव्यवस्था, फाइनेंस और शेयर मार्केट से जुड़ी नई-नई जानकारियों के लिए आप हमारी वेबसाइट से जुड़ें रहें।

इन्हें भी विस्तार से पढ़ें (Related Post) –

Share this:

Leave a Comment