Derivative Meaning in Hindi_डेरीवेटिव ट्रेडिंग क्या है

Derivative Meaning in Hindi | डेरीवेटिव ट्रेडिंग क्या है?

Derivative Meaning in Hindi: डेरिवेटिव्स एक वित्तीय उत्पाद हैं। डेरिवेटिव्स का मूल्य अंतर्निहित परिसंपत्तियों (Underlying Assets) से प्राप्त होता है। अंतर्निहित परिसंपत्तियाँ (Underlying Assets) स्टॉक, कमोडिटीज, बॉन्ड, मुद्राएं और मार्केट इंडेक्स आदि हो सकती हैं। व्युत्पन्न (Derivative) बुनियादी तौर पर हेजिंग और ट्रेडिंग इंस्ट्रूमेंट है।

Derivative की शुरुआत कमोडिटी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के बचाव के उपकरणों के रूप में किया गया था। आगे वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के कारण, इसे अब वित्तीय बाज़ारों में भी अपनाया गया।

स्टॉक, कमोडिटीज, बॉन्ड जैसे अंतर्निहित परिसंपत्तियों (Underlying Assets) का मूल्य बाजार की स्थितियों के अनुसार हमेशा बदलता रहता है। डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग करने के पीछे का उद्देश्य भविष्य में अंतर्निहित परिसंपत्तियों (Underlying Assets) के मूल्य पर अनुमान लगाकर लाभ अर्जित करना है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लाभ (Benefits of Derivative Trading)

अब प्रश्न ये आता है कि, ट्रेडर्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग क्यों करते हैं? लाभ कमाने के अलावा, डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स (Derivative Meaning in Hindi) में ट्रेडिंग के पीछे कई अन्य कारण हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं:

बाजार की अस्थिरताओं से सुरक्षा

बाजार में सम्पति की कीमत में उतार-चढ़ाव से आपके नुकसान की संभावना (प्रोबेबिलिटी) बढ़ जाती है। Derivative कॉन्ट्रैक्ट्स से आप अपने स्टॉक्स के मूल्य में होने वाली कमी से काफ़ी हद तक बच सकते है। डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स आपके कम होते स्टॉक वैल्यू के ढाल/बचाव के तौर पर काम करते है।

आर्बिट्रेज प्रॉफिट

Derivative कॉन्ट्रैक्ट्स से एक दूसरा लाभ आर्बिट्रेज ट्रेडिंग के रूप में मिलता है। आर्बिट्रेज ट्रेडिंग क्या है? तो, एक बाजार में कम कीमत पर एक स्टॉक्स या कमोडिटी खरीदना और दूसरे बाजार में इसे उच्च कीमत पर बेचना है। इसप्रकार से आप दो अलग-अलग बाजारों में स्टॉक्स या कमोडिटी की कीमतों में अंतर से लाभान्वित होते हैं।

लिवरेज 

डेरिवेटिव ट्रेडिंग का एक और लाभ इन्वेस्टर्स को लिवरेज (Leverage) के रूप में मिलता है। ट्रेडर को डेरिवेटिव ट्रेडिंग में कुल कॉन्ट्रैक्ट मूल्य का कुछ ही प्रतिशत मार्जिन मनी के रूप में देना होता है। इससे ट्रेडर को कम पैसे में बड़े लाभ का अवसर मिल जाता है।

जोखिम का स्थानांतरण

बहुत से इन्वेस्टर इसका इस्तेमाल स्पेकुलेशन (Speculation) और मुनाफा कमाने के लिए करते हैं। वहीं कुछ इन्वेस्टर अपने जोखिम को स्थानांतरित करने के साधन के रूप में डेरिवेटिव का इस्तेमाल करते हैं। डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स इन्वेस्टर के ट्रेडिंग लॉसेस को बैलेंस करने का एक अच्छा तरीका है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के प्रकार (Types of Derivatives in Hindi)

डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स विभिन्न प्रकार के होते हैं। नीचे चार प्रमुख प्रकार के डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स ऑप्शन, फॉरवर्ड, फ्यूचर्स और स्वैप समझते को है:

फ्यूचर (Futures)

फ्यूचर एक स्टैंडर्ड डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स है। फ्यूचर्स इन्वेस्टर को निर्धारित डेट में सहमत मूल्यों पर संपत्ति खरीदने/बेचने की अनुमति देते हैं। फ्यूचर के कॉन्ट्रेक्टों मूल्य हर रोज बाजार से चिह्नित किया जाता है।

एक्सपाइरी तक बाजार के मूवमेंट के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट मूल्य एडजेस्ट किये जाते है। इसप्रकार फ्यूचर भी एक डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के रूप में ट्रेडर के द्वारा ट्रेड किये जाते है।

ऑप्शन (Options)

ऑप्शन डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स होता है। ऑप्शन खरीदार को एक निश्चित अवधि के दौरान निर्दिष्ट मूल्य पर अंतर्निहित परिसंपत्ति को खरीदने / बेचने का अधिकार देता है। ऑप्शन का उपयोग करने के लिए खरीदार किसी भी दायित्व के तहत नहीं है।

ऑप्शन के सेलर को ऑप्शन राइटर के रूप में जाना जाता है। स्ट्राइक प्राइस को निर्दिष्ट मूल्य को कहा जाता है। ऑप्शन की अवधि की समाप्ति से पहले आप किसी भी समय अमेरिकी ऑप्शन का उपयोग कर सकते है। जबकि यूरोपीय ऑप्शंस का उपयोग केवल समाप्ति तिथि के दिन ही किया जा सकता है।

फॉरवर्ड (Forwards)

फॉरवर्ड में होल्डर कॉन्ट्रैक्ट करने के दायित्व के तहत होता है। फॉरवर्ड अस्थिर है और स्टॉक एक्सचेंजों पर इसका कारोबार नहीं किया जाता है। फॉरवर्ड ओवर-द-काउंटर उपलब्ध हैं और फ्यूचर की तरह मार्क-टू-मार्केट नहीं हैं।

स्वैप (Swaps)

स्वैप, डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स है। स्वैप में दो पक्ष अपने वित्तीय दायित्वों का आदान-प्रदान करते हैं। इसका कारोबार स्टॉक एक्सचेंजों पर नहीं किया जाता है। स्वैप व्यवसायों/वित्तीय संस्थानों के बीच ओवर-द-काउंटर अनुबंध होते हैं। दोनों पक्षों के बीच आम सहमति आधार पर नगदी प्रवाह मूल धन पर होती है। नकदी प्रवाह की राशि ब्याज दर पर निर्भर होती है।

डेरीवेटिव ट्रेडिंग रणनीति (Derivative Trading Strategies)

डेरिवेटिव ट्रेडिंग में बहुत-सी रणनीतियां अपनाई जाती हैं। ट्रेडर अपने अनुभव और परिस्थितियों के अनुसार अपने स्तर पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग की रणनीति अपनाते हैं। डेरिवेटिव ट्रेडिंग की रणनीतियां बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव, खबरों और कंपनियों के शेयर्स पर होने वाले कारोबार इत्यादि के आधार पर तैयार होती हैं।

शेयर ट्रेडिंग की रणनीतियां निवेशकों के द्वारा निम्न बातों को ध्यान में रखकर अपनायी जाती हैं। एक वर्तमान बनाए ट्रेडिंग पोजीशन के जोखिम को कम से कम करना और दूसरा डेरिवेटिव ट्रेडिंग कर सीधा लाभ कमाना। दोनों ही परिस्थियों में ट्रेडर्स डेरीवेटिव ट्रेडिंग का प्रयोग करते है।

ट्रेडर्स बाजार में अपनी डेरिवेटिव ट्रेडिंग में प्रायः फ्यूचर और ऑप्शन के कॉन्ट्रैक्ट्स पर अपना पोजीशन बनाते है। ऑप्शन पर कॉल और पुट के जरिए तेजी-मंदी का पोजीशन बनाया जाता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

मैं आशा करता हूँ कि, आपको यह आर्टिकल Derivative Meaning in Hindi (डेरीवेटिव ट्रेडिंग क्या है?) पढ़कर अच्छा लगा होगा और  डेरीवेटिव ट्रेडिंग से जुड़ी ये जानकारियां आपके लिए लाभदायक रही होगी।

अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो तो अपने परिचितों और शेयर मार्केट को सीखने के लोगों के साथ इसे शेयर ज़रूर करें।

इस विषय पर आपके और कोई आपके प्रश्न है, तो आप नीचे Comment Section में ज़रूर लिखें। हम आपके सवालों का जवाब देने प्रयास करेंगे। शेयर मार्केट जुड़ी नयी जानकारियों के लिए इस वेबसाइट से जुड़े रहें।

इन्हें भी विस्तार से पढ़ें (Related Post) –

Share this:

Leave a Comment

error: Content is protected !